‘हिंदी भाषी राष्ट्र में हिंदी दिवस जैसे शब्दों का प्रयोग गलत’

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‘हिंदी भाषी राष्ट्र में हिंदी दिवस जैसे शब्दों का प्रयोग गलत’

मेरठ ब्यूरो

Updated Mon, 23 Aug 2021 11:51 PM IST Updated Mon, 23 Aug 2021 11:51 PM IST

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‘हिंदी भाषी राष्ट्र में हिंदी दिवस जैसे शब्दों का प्रयोग गलत’

चांदपुर। गुलाब सिंह हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय चांदपुर से सेवानिवृत्त हिंदी प्रोफेसर डॉ. महेश दिवाकर विदेशों तक में हिंदी को प्रोत्साहित कर रहे हैं। डॉ. दिवाकर ने चांदपुर में 1988 में नवजात साहित्य कलामंच के नाम से संस्था स्थापित कर हिंदी को प्रोत्साहन देने का काम शुरू किया। संस्था के माध्यम से अनेक कवियों, लेखकों की रचनाओं को संग्रहित कर पुस्तक प्रकाशित कराई। डॉ. दिवाकर हिंदी दिवस या हिंदी पखवाड़े जैसे शब्दों को औचित्यहीन मानते हैं। उनका कहना है कि हिंदी भाषी राष्ट्र में हम ऐसे शब्दों का प्रयोग करके भाषा का अपमान कर रहे हैं।

हिंदी साहित्यकार डॉ. महेश दिवाकर का जन्म एक जनवरी 1950 को मुरादाबाद के गांव महलकपुर में ठाकुर कृपाल सिंह पंवार के यहां हुआ। उनकी नियुक्ति वर्ष 1983 में गुलाब सिंह हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय चांदपुर में हिंदी प्रवक्ता के पद पर हुई। 1988 में उन्होंने होली के दिन कुछ साहित्यकारों के साथ मिलकर चांदपुर में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए नवजात साहित्यकार मंच की स्थापना की थी। इसके तहत काम होता रहा और मंच का विस्तार होता रहा। फिर जरूरत के हिसाब से 1996 में इसका नाम साहित्य कला मंच कर दिया गया। 2006 में अखिल भारतीय साहित्य कला मंच कर दिया गया। विदेश तक हिंदी को पहुंचाने का काम हुआ। 2012 में संस्था को अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य कला मंच का नाम दिया गया।

हिंदी में पीएचडी, डीलिट की उपाधि प्राप्त डॉ. दिवाकर की 150 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी सबसे पहली पुस्तक यादों के आरपार चांदपुर में 1988 में प्रकाशित हुई थी। डॉ. दिवाकर अब तक करीब 40 से ज्यादा युवाओं को हिंदी में पीएचडी करा चुके हैं। डॉ. दिवाकर हिंदी दिवस या हिंदी पखवाड़े जैसे शब्दों को औचित्यहीन मानते हैं। उनका कहना है कि हिंदी भाषी राष्ट्र में हम ऐसे शब्दों का प्रयोग करके भाषा का अपमान कर रहे हैं। अंग्रेजी दिवस की बात करें तो उचित है। साहित्यकार डॉ. महेश दिवाकर ने हिंदी को प्रोत्साहन देने के लिए गुलाब सिंह हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय से निवृत्त होने के बाद भी हिंदी को प्रोत्साहन देने का कार्य कर रहे हैं।

डॉ. दिवाकर को मिले सम्मान

हिंदी क्षेत्र में काम करते हुए डॉ. महेश दिवाकर को 2008 में नार्वे में विशिष्ट साहित्य सम्मान, 2011 में वैस्टइंडीज में ट्रिनिडाड हिंदी शिखर सम्मान, 2012 में मॉरिशस मेें विश्व हिंदी सेवी सम्मान, 2013 को नेपाल में विश्व हिंदी सेवी सम्मान व श्रीलंका में निराला सृजन सम्मान, 2014 में सिंगापुर में साहित्य श्री सम्मान व दुबई में विश्व हिंदी सेवी सम्मान, 2016 में फ्रांस में विश्व हिंदी सेवी सम्मान, 2017 में आस्ट्रेलिया में महाकवि मैथिलीशरण गुप्त स्मृति हिंदी सेवी सम्मान से सम्मानित किया गया है।

प्रकाशित पुस्तकें

यादों के आरपार, प्रणयगंधा, प्रेरणा के दीप, अतीत की परछाई, नेह केसरसिज, काव्यधारा, नई शती के नाम, हे मातृभमि भारत, आखर आखरगंध, क्या कहकर पुकारूं, बाल सुमनों के नाम, आजू राजू आदि।

Sadbhavna Diwas 2021 History, Quotes, Wishes in Hindi, Images, Posters, WhatsApp Status: सद्भावना दिवस इतिहास, कोट्स, मैसेज व ईमेज

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Sadbhavna Diwas 2021 Quotes, Message, Images

  1. कुछ दिनों के लिए, लोगों को लगा की भारत हिल गया है. लेकिन उनको यह पता होना चाहिए कि जब एक महान पेड़ गिरता है तो हमेशा झटके लगते है - राजीव गाँधी

  2. भारत एक प्राचीन देश, लेकिन एक युवा राष्ट्र है. मैं जवान हूँ और मेरा भी एक सपना है. मेरा सपना है भारत को मजबूत, स्वतंत्र, आत्मनिर्भर और दुनिया के सभी देशों में से प्रथम रैंक में लाना और मानव जाति की सेवा करना- राजीव गाँधी

  3. क्रोध कभी बिना तर्क के नहीं होता- राजीव गाँधी

  4. अगर मैं एक हिंसक मौत मरती हूँ,जैसा की कुछ लोग डर रहे हैं और कुछ षड्यंत्र कर रहे हैं, मुझे पता है कि हिंसा हत्यारों के विचार और कर्म में होगी, मेरे मरने में नहीं- राजीव गाँधी

When is National Hindi Divas 2021: Date, significance and all you need to know

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Hindi Diwas is observed on September 14, every year. Hindi is the fourth most spoken language in the world after English, Spanish and Mandarin. World Hindi Day is celebrated on January 10.

Hindi is one of the most widely spoken languages of India, with most of North India celebrating the language as their mother tongue. Every year on Hindi Diwas, the President of India presents the Rajbhasha awards to people for their contribution towards the language at a ceremony in Delhi.

It is one of the 22 scheduled languages of the Republic of India. Hindi Diwas is dedicated to promote and propagate the official language. Also, this day is celebrated; as a patriotic reminder to Indian populations of their common roots and unity.

Hindi Diwas: History

On September 14, 1949, the Constituent Assembly of India adopted Hindi as the official language of the newly formed nation. The decision was then accepted and it became a part of the Indian constitution on January 26, 1950. The first Hindi Diwas was celebrated in 1953.

About Hindi:

Hindi belongs to the Indo-Aryan branch of the Indo-European family of languages. Hindi, along with English, are the official languages of India. According to Article 343, “The official language of the Union shall be Hindi in the Devanagari script. The form of numerals to be used for the official purpose of the Union shall be the international form of Indian numerals.”

Hindi was the language that was adopted by Indian leaders as a symbol of national identity during the struggle for freedom. Hindi has been used as a literary language since the twelfth century.

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